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            राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान, 116 राजपुर मार्ग, देहरादून, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन कार्यरत सात राष्ट्रीय संस्थानों में से एक है। यह संस्थान वर्ष 1943 में युद्ध में दृष्टिहीन सैनिकों हेतु सेंट डंस्टन छात्रवास के रूप में अस्तित्व में आया, जो द्वितीय विश्व युद्ध में दृष्टिहीन हुए सैनिकों और नाविकों को मूलभूत पुनर्वास सेवाएं प्रदान करता था। वर्ष 1950 में भारत सरकार ने सेंट डंस्टन छात्रवास को अपने नियंत्रण में लिया और दृष्टिहीन व्यक्तियों को पुनर्वास हेतु व्यापक स्तर पर सेवाएं विकसित करने का उत्तरदायित्व शिक्षा मंत्रालय को सौंपा। तदन्तर दृष्टिहीनों हेतु सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ। इसी वर्ष सरकार ने कार्य के क्षेत्र में दृष्टिहीन सैनिकों एवं अन्य व्यक्तियों के पुनः एकीकरण के लिए प्रौढान्ध प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की। सरकार ने वर्ष 1954 में आश्रयी कार्यशाला, वर्ष 1957 में प्रौढान्ध महिलाओं हेतु प्रशिक्षण केंद्र और वर्ष 1959 में दृष्टिबाधितार्थ आदर्श विद्यालय की स्थापना की। वर्ष 1963 में राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ पुस्तकालय की स्थापना की गई।
            वर्ष 1967 में सभी इकाईयों में एकीकरण के पश्चात सरकार ने राष्ट्रीय दृष्टिहीनार्थ केंद्र (एनसीबी) की स्थापना की। इस केंद्र को वर्ष 1979 में राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान के रूप में पुनः समुन्नत किया गया और अंततः वर्ष 1982 में इसका संस्था पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकरण कराया गया और इसे स्वायत्त निकाय का दर्जा प्राप्त हुआ।
            देहरादून में स्थित संस्थान का परिसर लगभग 1,74,150 वर्ग मीटर (43 एकड़) के क्षेत्र में है। यहाँ 08 सरकारी इमारतें हैं,जिनका कुर्सी क्षेत्र 19,000 वर्ग मीटर, 119 आवासीय क्वार्टर हैं, जिनका कुर्सी क्षेत्र 7800 वर्ग मीटर, 3 छात्रावास की इमारतें हैं, जिनका कुर्सी क्षेत्र 13,500 वर्ग मीटर है और औषधालय की इमारत का 350 वर्ग मीटर कुर्सी क्षेत्र है। यहाँ 11,700 वर्ग मीटर की सड़कें, जल आपूर्ति लाइनें, सीवर लाइनें, विघुत आपूर्ति लाइनें इत्यादि हैं।
            संस्थान का क्षेत्रीय केंद्र दक्षिणी क्षेत्र की दृष्टिबाधित जनसंख्या की प्रशिक्षण एवं पुनर्वास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्ष 1988 में पूनमल्ली, चेन्नई में स्थापित किया गया। यह केंद्र शहरी के साथ-साथ ग्रामीण दृष्टिहीन व्यक्तियों हेतु व्यवसायिक प्रशिक्षण एवं रोजगार के नये क्षेत्रों का पता लगाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • ‘निपवेड’ क्षेत्रीय केंद्र, पूनमल्ली, चेन्नई की कुल भूमि 24,300 वर्गमीटर (6 एकड़) है।
  • इसका प्रशिक्षण खंड 761.34 वर्ग मीटर कुर्सी क्षेत्र।
  • प्रशासनिक खंड 388.12 वर्ग मीटर कुर्सी क्षेत्र।
  • छात्रावास खंड एवं भोजनालय 1000.47 वर्ग मीटर कुर्सी क्षेत्र।
  • महिला छात्रावास खंड 715 वर्ग मीटर कुर्सी क्षेत्र का है।

            सिकंदराबाद और कोलकाता में ‘निपवेड’ क्षेत्रीय इकाईयों की स्थापना वर्ष 1997 में क्रमशः एन.आई.एम.एच., सिकंदराबाद और एन.आई.ओ.एच., कोलकाता के परिसर में आरंभ में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को परिसरीय सेवाएँ प्रदान करने और राज्य व स्वैच्छिक संगठनों को निर्देशन व परामर्श देने के उद्देश्य से की गई थी।
            संस्थान वर्ष 2001 में सुन्दरनगर(हि.प्र) में स्थापित दिव्यांगजन संयुक्त क्षेत्रीय केंद्र का समन्वयन एवं पर्यवेक्षण भी करता है।

सोमवार को अंतिम अपडेट, 25 मार्च 2019 02:12

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