ब्रेल विकास

            ब्रेल एक ऐसा सशक्त माध्यम है,जिससे दृष्टिहीन व्यक्ति स्वतंत्र रूप से पढ़ एवं लिख सकते हैं, विवेनात्मक एवं सृजनात्मक ढ़ंग से सोच सकते हैं। इसके माध्यम से दृष्टिहीन व्यक्ति उपयोगी एवं लाभपूर्ण ज्ञान व सम्प्रेषण कौशल प्राप्त कर समाज में अपना एक स्थान बना सकते है। ब्रेल के माध्यम से प्राप्त शिक्षा से उनका सर्वांगीण विकास होता है, और वे आत्मजागृति, आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता के अमूल्य गुणों को धारण कर सकते हैं।
            राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान ब्रेल विकास के क्षेत्र में अपने दीर्धकालिक एवं गहन अध्ययन के कारण एक महत्वपूर्ण संस्थान माना जाता है। इसके ब्रेल विकास विभाग ने भारती ब्रेल, जो देश की सभी शासकीय भाषाओं के अनुरूप मानकीकरण की एक पद्धति है, विकास के साथ-साथ गणित, संगीत एवं विज्ञान की संकेत लिपियाँ भी विकसित की हैं। ब्रेल विकास विभाग ने देश की अधिकांश शासकीय भाषाओं में ब्रेल संकोचों एवं संक्षेपों का भी योगदान दिया है।
            देश की शासकीय भाषाओं एवं अन्य स्वरलिपिओं हेतु ब्रेल सहिताएँ विकसित करने और उन्हें संशोधित करने के अतिरिक्त, इस एकक ने ब्रेल के प्रचार और लोकप्रियता हेतु आवश्यक अनेक परियोजनाओं पर अनुसंधान अध्ययनों पर कार्य किया। वर्तमान में यह दो मुख्य अध्ययनों “दृष्टिबाधा में विशेषज्ञता सहित विशिष्ट शिक्षा में बी.एड. प्रस्तावित करने वाले विश्वविद्यालयों में ब्रेल शिक्षण की स्थिति पर एक अध्ययन” और “भारत में भारती ब्रेल की समीक्षा” पर कार्य कर रहा है।
            भारत में ब्रेल के विकास का निरीक्षण करने व इसे समृद्ध बनाने के लिए इस विभाग की पर्यवेक्षण एवं अनुवीक्षण कार्य हेतु अत्यंत मांग है। इसने वर्ष 2008 में भारतीय ब्रेल परिषद (बीसीआई) की स्थापना करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई। इस परिषद का विशिष्ट उद्देश्य ब्रेल विकास एवं देश में ब्रेल उत्पादन संबंधी समस्त विषयों में संस्थान निदेशक की सहायता करना व परामर्श देना भी है। यद्यपि बीसीआई मुख्यता एक परामर्शदाता निकाय है, लेकिन इस परिषद के निर्णय मार्गदर्शक बिंदु एवं संस्तुतियाँ देश में ब्रेल संबंधी गतिविधियों को आधार प्रदान करते हैं। ब्रेल लेखन, ब्रेल अनुवाद सॉफ्टवेयर, ब्रेल उत्पादन अथवा ब्रेल शिक्षण से संबंधित हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर के संबंध में सभी नई प्रौद्योगिकी को बीसीआई के अनुमोदन से मान्यता दी जाती है अथवा उनका अनुलिपिकरण किया जाता है।
            वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 में परिषद ने बैठकों के तीन सत्र प्रथम 12 सितंबर से 13 सितंबर, 2008 के बीच और द्वितीय दिनांक 28.3.2009 को तथा तृतीय सत्र 20 मार्च, 2010 को देहरादून में आयोजित किए। इन सत्रों में ब्रेल विकास संबंधी मुददों को प्राथमिकता दी गई और आगामी वर्ष हेतु कार्य योजना भी बनाई गई। परिषद ने कर्नाटक संगीत हेतु नव विकसित ब्रेल सहिताओं की समीक्षा भी की। इसने राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ मिलन दास द्वारा बनाये गये दो ब्रेल उपकरणों के आधरूपों का परीक्षण भी किया।

संपर्क नंबर संपर्क नंबर: 0135-2734016

मंगलवार को अंतिम अपडेट, 23 अप्रैल 2019 10:35

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