क्लिनिकल एवं पुनर्वास मनोविज्ञान एवं अनुसंधान

पुनर्वास विभाग

            पुनर्वास एक प्रक्रिया है, जो दिव्यांगजनों को अधिकत्तम स्वतंत्रता प्राप्त करने और बनाये रखने में समर्थ बनाती है तथा शारीरिक मानसिक सामाजिक व व्यवसायिक योग्यता का पूर्ण प्रयोग करने एवं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण समावेश व भागीदारी सुनिश्चित करती है। इसके लिए पुनर्वास विभाग द्वारा सेवाओं का एक भाग प्रस्तावित किया जा रहा है।

1. स्वतंत्र जीवन के कौशलों में प्रशिक्षण
            स्वतंत्र जीवन के कौशलों में प्रशिक्षण किसी भी पुनर्वास कार्यक्रम का एक मुख्य घटक है। यह प्रशिक्षण नव दृष्टिहीन व्यक्तियों को जीवन के दिन-प्रतिदिन के कार्यों को यथा संभव स्वतंत्र तरीके से करने हेतु कौशल सीखने में समर्थ बनाता है। इन प्रशिक्षण में से एक तीन माह की अवधि का प्रशिक्षण देहरादून में है और दूसरा 45 दिन की अवधि का क्षेत्रीय केंद्र , चेन्नई तथा क्षेत्रीय इकाई कोलकाता में चलाया जा रहा है। इसके मुख्य घटक श्वेत छड़ी एवं दृष्टिवान सहायक की सहायता से एवं चलिष्णुता में प्रशिक्षण, ब्रेल एवं अनुकूलित प्रौद्योगिकी का प्रयोग गृह प्रबंध, व्यक्तिगत रख-रखाव तथा मनो-सामाजिक समायोजन में प्रशिक्षण देना है।

2. मार्गदर्शन एवं परामर्श
            अचानक दृष्टिहीन होने से भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक स्तर पर गंभीर प्रभाव होते हैं। कुछ मामलों में, यदि दृष्टिहीनता के आघात पर उचित प्रकार से ध्यान नहीं दिया जाता तो परिणामस्वरूप अवसाद एवं सामाजिक रूप से पलायनता आ जाती है। नव दृष्टिहीन व्यक्तियों की सहायता के लिए, संस्थान ने वर्ष 1983 में संकटकालीन हस्तक्षेप एकक की स्थापना की। इसने न केवल उनका मनो-सामाजिक मूल्यांकन किया अपितु आत्म विश्वास एवं आत्म-सम्मान को बनाये रखने के लिए मार्गदर्शन एवं परामर्श भी दिया। यह एकक संदर्भ केंद्र के रूप में भी कार्य करता है, क्योंकि अनेक नव दृष्टिहीनों को उनके कार्य, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शिक्षा तथा उनके सामाजिक जीवन में पुनः एकीकरण के लिए व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।

3. एडिप योजना के अंतर्गत सहायक उपकरणों का वितरण एवं उन्हें लगाना
            यह विभाग दिव्यांगजनों हेतु बनाये गये सहायक उपकरणों एवं प्रौद्योगिकी की उपलब्धता, ज्ञान व प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु प्रतिबद्ध है क्योंकि वे सीधे तौर पर उनके आवास एवं पुनर्वास से संबंध है।
            सरकार का यह निरंतर प्रयास रहा है कि दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक एवं व्यवसायिक पुनर्वास को बढ़ावा देने हेतु आवश्यक सहायक सामग्री/उपकरण उन्हें न्यूनतम लागत पर उपलब्ध कराये जायें। एडिप योजना के लोगों को उपलब्ध कराने के लिए, संस्थान वर्षभर संयुक्त पुनर्वास शिविर आयोजित करता है। इन शिविरों में उच्च शिक्षित व अनुभवी पुनर्वास एवं चिकित्सा व्यवसायिकों का एक दल दिव्यांगजनों को सेवाएँ प्रदान करता है। वे कार्यात्मक एवं चिकित्सा मूल्यांकन करते है और व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण तथा प्रोस्थेटिक व ओर्थोटिक उपकरणों का सुझाव देते हैं। शिविर स्थल पर मार्गदर्शन एवं परामर्श सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाती है। आवश्यकतानुसार सुधारात्मक शल्य-चिकित्सा (करेक्टिव सर्जरी) भी की जा रही है। अधिकांश मामलों में सहायक उपकरण शिविर स्थल पर दिए जाते हैं। जहाँ उपकरणों को व्यक्तिगत आवश्यकतानुसार बनाया जाना है, उसके लिए एक अनुवर्ती शिविर आयोजित किया जाता है। साधारणतया, एक माह में चार से पांच शिविर आयोजित किये जाते हैं और वार्षिक रूप से 15,000 से अधिक व्यक्ति इससे लाभ प्राप्त करते हैं।

पात्रता मापदंड
            एक दिव्यांगजन जो निम्नलिखित शर्तें पूर्ण करता हो, वह एडिप योजना के अंतर्गत निपवेड, इसके क्षेत्रीय केंद्र इकाईयाँ एवं सीआरसी, सुंदरनगर के माध्यम से एडिप योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने का पात्र है:
– वह किसी भी आयु का भारतीय नागरिक होने चाहिए।
– उन्हें अपनी विकलांगता के संबंध में और निर्धारित सहायक सामग्री/उपकरण के प्रयोग हेतु पात्रता का प्रमाणपत्र पंजीकृत चिकित्सक से प्राप्त कर प्रस्तुत करना होगा।
– वह व्यक्ति,जो सेवारत हैं/स्व-रोज़गार प्राप्त है अथवा पेंशन भोगी हैं और जिनकी सभी स्रोतों से मासिक आय प्रतिमाह 10,000/- रुपये से अधिक न हो।
– आश्रितों के मामले में, माता-पिता/अभिभावकों की आय रुपये 10,000/- प्रतिमाह से अधिक न हो।
– जिन व्यक्तियों ने इस उद्देश्य हेतु विगत 3 वर्षों में सरकार, स्थानीय निकायों से सहायता प्राप्त नहीं की है। यद्यपि, 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों हेतु यह सीमा एक वर्ष है।

सोमवार को अंतिम अपडेट, 15 अप्रैल 2019 12:12

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