प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं शोध

अनुसंधान एवं विकास

            संस्थान का एक प्रमुख उद्देश्य दृष्टिबाधित व्यक्तियों की शिक्षा, पुनर्वास एवं सशक्तिकरण के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान का आयोजन, प्रायोजन, समन्वय एवं/अथवा सहायता उपलब्ध कराना है। इसके मुख्य उद्देश्य के अनुसार, संस्थान पिछले 3 दशकों में लगभग 125 अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य किया है। इनमें से 115 परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं। संस्थान के अनुसंधान प्रयासों ने न केवल दृष्टिबाधित व्यक्तियों के राष्ट्रीय मुख्य धारा में एकीकरण हेतु आवश्यक अनेक नीतिगत मुद्दों पर वाद-विवाद को प्रोत्साहित किया, बल्कि अनेक विकासात्मक कार्यक्रमों एवं योजनाओं के विकास तथा क्रियान्वयन में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। अनुसंधान एवं विकास प्रयासों के अंतर्गत 15 विभिन्न उपकरण डिज़ाइन एवं विकसित किए गए, जिससे दृष्टिबाधित व्यक्तियों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता की अधिक स्वतंत्रता मिली। अब तक आरंभ की गई परियोजनाओं को रूप से चार मुख्य वर्गों-शिक्षा, रोज़गार, पुनर्वास एवं मूल्यांकन व स्वतंत्र जीवन-यापन हेतु उपकरण में बांटा जा सकता है। विगत वर्षों में संस्थान ब्रेल विकास के क्षेत्र में एक विशेषज्ञ निकाय के रूप में विकसित हुआ है। संस्थान के अनुसंधान प्रयासों की सर्वत्र सराहना हुई है।

            संस्थान के अनुसंधान प्रयासों के प्रति अपेक्षित उन्मुखीकरण के लिए श्री ए.के.मित्तल, अध्यक्ष, अखिल भारतीय दृष्टिहीन परिसंघ, नई दिल्ली की अध्यक्षता में एक अनुसंधान सलाहकार समिति का गठन किया गया है। इस समिति के सदस्य अनुसंधान एवं विकास के व्यापक संस्थाओं, प्रमुख विश्वविद्यालयों और स्वैच्छिक संगठनों से लिए गए है। इस समय हमारा अनुसंधान समिति में प्रो एस.आर.मित्तल, प्रोफेसर, निपवेड, देहरादून, प्रो अनीता जुल्का, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली, प्रो लीना कश्यप, स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज, मुंबई, डॉ. आर.शाह, वैज्ञानिक ‘जी’, सलाहकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली, डॉ एम.एन.जी. मणि, महासचिव, आईसीईवीआई सचिवालय, कोयंबटूर, तमिलनाडु और डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, विशिष्ट शिक्षा विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र सदस्य हैं।

समिति के मुख्य कार्य इस प्रकार है:
1. संस्थान की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों हेतु प्राथमिकता क्षेत्र निर्धारित करना।
2. संस्थान द्वारा आरंभ की जाने वाली नई अनुसंधान परियोजनओं पर विचार करना और इन्हें संस्थान की कार्यकारी परिषद के समक्ष संस्तुति हेतु प्रस्तुत करना।
3. चयनित परियोजनाओं की प्रगति की मध्यावधि समीक्षा करना और मध्यांतर में संशोधन करने की व्यवस्था करना।
4. यह सुनिश्चित करना कि अनुसंधान के निष्कर्ष संस्थान की गतिविधियों के सुधार में प्रत्यक्ष रूप से योगदान देंगे। उदाहरणार्थ-मानव संसाधन विकास, शिक्षा, व्यवसायिक प्रशिक्षण, पुस्तक उत्पादन एवं उपकरण निर्माण इत्यादि।
5. संस्थान को सहयोगी अनुसंधान में सहायता करना और सार्थक अनुसंधान कार्य में संलग्न मुख्य धारा की एवं विशिष्ट एजेंसियों तथा संगठनों के साथ सम्पर्क स्थापित करना।
6. यथा आवश्यकता गैर-सरकारी संगठनों को आवश्यकता पर आधारित अनुसंधान गतिविधियों को शुरू करने तथा कार्यान्वित करने में आवश्यक मार्गदर्शन व तकनीकी सहायता देना।

अनुसंधान और विकास परियोजना 2010-11 से 2014-15 (पिछले पांच वर्ष) (97 केबी)

अनुसंधान और विकास परियोजना 2015-16 (14 एमबी)

संपर्क नंबर संपर्क नंबर: 0135-2104813 (एमबीए)

शुक्रवार को अंतिम अपडेट, 15 मार्च 2019 10:24

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